ये दिल अब पहले जैसा किसी पर भरोसा नहीं करता।”
जैसे मुझसा बुरा दुनिया में कोई और नहीं।
जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम…!!
अब कोई मिले या ना मिले… फर्क ही नहीं पड़ता।
दरख़्त-ए-नीम हु मै मेरे नाम से घबराहट हो गई,
जिन्हें मिलती मंज़िल उंगलियों पे वो खुश है।
जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
हम जिसपे खिलते है, उसी पे मुर्झा भी जाते है…!
डूब जाते है आँखों में ख्वाबो के सभी जहाज,
और एक तेरा प्यार है जो मुझे मरने नही देता,
गुमान तक ना हुवा की वो बिछड़ने वाली है !
किसी के पास यकीन का कोई इक्का हो तो बताना,
वो मुस्कुरा देती है ताकि कोई दर्द पहचान न पाए,
हमे पता है Sad Shayari in Hindi की तुम कहीं और के मुसाफिर हो,